उस्मान ख्वाजा का करियर सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं, बल्कि पहचान, बराबरी और अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई भी रहा। रेसियल स्टीरियोटाइपिंग, मीडिया की सख्ती, आईसीसी से टकराव और दोहरे मापदंडों के आरोप, इन सबके बीच ख्वाजा ने अपनी आवाज नहीं दबने दी।
उस्मान ख्वाजा का करियर सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं, बल्कि पहचान, बराबरी और अभिव्यक्ति की आजादी की लड़ाई भी रहा। रेसियल स्टीरियोटाइपिंग, मीडिया की सख्ती, आईसीसी से टकराव और दोहरे मापदंडों के आरोप, इन सबके बीच ख्वाजा ने अपनी आवाज नहीं दबने दी।