बिजली जैसी तेजी से बढ़ता मलबा…। ढहते मकान…गिरते पेड़…सब तेजी से मलबे के साथ मिलकर आगे बढ़ते हुए। कहीं खून से लथपथ शव, कहीं टूटी पड़ीं पसलियां तो कहीं कटे अंग बिखरे पड़े हुए…।
बिजली जैसी तेजी से बढ़ता मलबा…। ढहते मकान…गिरते पेड़…सब तेजी से मलबे के साथ मिलकर आगे बढ़ते हुए। कहीं खून से लथपथ शव, कहीं टूटी पड़ीं पसलियां तो कहीं कटे अंग बिखरे पड़े हुए…।