2017 में कप्तानी परिवर्तन कोई टकराव नहीं बल्कि समझदारी से लिया गया फैसला था। चयनकर्ताओं ने सम्मानपूर्वक बात रखी, धोनी ने सहमति दी, लिखित में पद छोड़ा और कोहली को हर संभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया। यही पेशेवर रवैया उनकी महानता की पहचान है।
2017 में कप्तानी परिवर्तन कोई टकराव नहीं बल्कि समझदारी से लिया गया फैसला था। चयनकर्ताओं ने सम्मानपूर्वक बात रखी, धोनी ने सहमति दी, लिखित में पद छोड़ा और कोहली को हर संभव सहयोग देने का भरोसा भी दिलाया। यही पेशेवर रवैया उनकी महानता की पहचान है।