कोई फिल्म निर्देशक बिल्कुल विपरीत ध्रुवी फिल्मों का निर्माण करे तो उसके सिनेमा को एकाएक तीन पीढ़ियों की नुमाइंदगी हासिल होती है। जैसे, यश चोपड़ा ने ‘दीवार’ बनाई। ‘दिल तो पागल है’ बनाई और बनाई ‘वीर जारा’।
कोई फिल्म निर्देशक बिल्कुल विपरीत ध्रुवी फिल्मों का निर्माण करे तो उसके सिनेमा को एकाएक तीन पीढ़ियों की नुमाइंदगी हासिल होती है। जैसे, यश चोपड़ा ने ‘दीवार’ बनाई। ‘दिल तो पागल है’ बनाई और बनाई ‘वीर जारा’।