सलाखें उसे सुधार न सकीं और न ही कानून का खौफ उसके सिर से आतंक का भूत उतार पाया। लश्कर-ए-तैयबा का शाबिर अहमद पिछले 21 वर्षों से आतंक की काली दुनिया का हिस्सा है।
सलाखें उसे सुधार न सकीं और न ही कानून का खौफ उसके सिर से आतंक का भूत उतार पाया। लश्कर-ए-तैयबा का शाबिर अहमद पिछले 21 वर्षों से आतंक की काली दुनिया का हिस्सा है।